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By चारु तिवारी on November 14, 2011
उत्तराखण्ड राज्य का ग्यारहवां स्थापना दिवस, बयालीस शहादतों और चालीस साल के संघर्ष के बाद मिला राज्य। सरकारी और गैर सरकारी स्तर पर जश्न की तैयारी है, जनता अपने सवालों में उलझी है, वह अपनी आकांक्षाओं का राज्य ढूंढ रही है। उसे अभी अपनी राजधानी नहीं मिली, जंगल पर अपना हक नहीं मिला, पानी पर [...]
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By चारु तिवारी on November 2, 2011
प्रवास में रहने वाले युवाओं की संस्था है ‘क्रिएटिव उत्तराखण्ड’ म्यर पहाड़’, उनका एक अभियान है ‘हिमालय बचाओ, हिमालय बसाओ।’ इसी के तहत वे वर्षभर उत्तराखण्ड के विभिन्न हिस्सों में कार्यक्रम आयोजित करते हैं। इनमें मुख्य रूप से इतिहास और संस्कृति बोध को महत्व दिया जाता है। पहाड़ के महापुरुषों, आंदोलनों और यहां के पुराने [...]
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By चारु तिवारी on July 10, 2011
देश भ्रष्टाचार के खिलाफ उभरे नायकों को देख रहा है। महाराष्ट्र से चलकर अन्ना दिल्ली आ गये, नये गांधी के रूप में। अलग-अलग शहरों में अपने गांधी दिखाई देने लगे। जंतर-मंतर से लेकर गांव-कस्बों तक नई क्रांति का उदघोष हो गया। एक आंदोलन ने कई लोगों के मन बदल दिये। यही वजह थी अंडरवर्ल्ड से [...]
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By चारु तिवारी on July 7, 2011
उत्तराखण्ड भाषा संस्थान ने पिछले दिनों राजधानी देहरादून में लोकभाषाओं के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए तीन दिवसीय सम्मेलन आयोजित किया। सरकार ने जिस मंशा से इसे किया था, उसे समझने में किसी को ज्यादा दिमागी जमाखर्च करने की जरूरत नहीं है। लोकभाषाओं पर सरकार की चिंता से सभी वाकिफ हैं। वैसे भी लोकभाषायें सरकार [...]
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By चारु तिवारी on July 6, 2011
प्रिय उमा भारती, तुम्हारे बारे में बहुत सुना है, राम जन्मभूमि आंदोलन की आप अगुआ रही हैं। हिन्दुओं पर तुम्हारे बहुत ‘परोपकार’ हैं, तुमने लोगों को भारतीयता सिखायी। तुम्हारे पूरे कुनबे ने राष्ट्रभक्ति का संस्थान खोला। उससे तुमने प्रमाणपत्र बांटने शुरू किये। नब्बे के दशक में तुम लोगों को लगा कि इस देश में ‘रामराज्य’ [...]
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By चारु तिवारी on March 30, 2011
शहीदे आजम भगत सिंह, राममनोहर लोहिया और शहीद उमेश डोभाल को हर वर्ष मार्च को उनकी पुण्यतिथि पर याद किया जाता है। इन्हें याद करने का मतलब है उस धारा को आगे बढ़ाना जो एक जातिविहीन, वर्गविहीन और समतामूलक समाज की परिकल्पना को साकार करना चाहती है। जब भी हम उन्हें याद करते हैं हमारे [...]
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By चारु तिवारी on February 22, 2011
आज से दस वर्ष पहले जब देश में तीन राज्य अस्तित्व में आये तो उनकी अपनी-अपनी प्राथमिकतायें थीं। भाजपा के नेतृत्व में उस समय केंद्र में राजग की सरकार थी। संसद में जब भाजपा ने वनांचल और उत्तरांचल पर बहस कराई तो झारखण्ड के लोगों ने कहा कि झारखण्ड हमारी अस्मिता का सवाल है। उन्होंने [...]
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By चारु तिवारी on February 21, 2011
पिछले दिनों अल्मोड़ा जनपद के चौखुटिया में एक विद्यालय के वार्षिकोत्सव में जाना हुआ। राज्य बनने के बाद पहाड़ को देखने के ये वे मौके हैं जो विकास के दर्शन को समझा सकते हैं। चूंकि हमने विकास की जो परिकल्पना की है, उसे हम कुछ सरकारी आयोजनों और एक ढर्रे पर चल रही नीतियों तथा [...]
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By चारु तिवारी on February 21, 2011
महापंडित राहुल सांस्कृतायन ने बागेश्वर की अपनी यात्रा का जो वर्णन किया है उससे तत्कालीन बागेश्वर के सामाजिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परिवेश को समझने में मदद मिलती है। उनके वर्णन वाले बैजनाथ से लेकर बागेश्वर तक का मार्ग अब उस तरह का नहीं रहा, अब वहां घोड़े से यात्रा नहीं होती। उसकी जगह पर मोटरगाडिय़ां [...]
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By चारु तिवारी on December 15, 2010
राजधानी दिल्ली में पहाड़ के युवा पत्रकारों की एक बड़ी जमात है, जो लंबे समय से उत्तराखण्ड के तमाम सवालों को लेकर सक्रिय रहे हैं। हालांकि पहाड़ के पत्रकारों की यहां एक संस्था उत्तराखण्ड पत्रकार परिषद के नाम से पिछले ढाई दशक से अस्तित्व में है। यह बड़े पत्रकारों का संगठन है, इसलिये चाहकर भी [...]
Posted in उत्तराखण्ड आजकल | Tagged badri dutt pandey, bhairav dutt dhuliya, bhole maharaj, gopeshwar kothiyal, journlist of uttarakhand, kashi singh airy, nishank, victor mohan joshi |
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