One response to “गैरसैंण मुद्दा : चुप्पी अब टूट रही है”

  1. घिंघारु

    चुप्पी तो उनकी तोड़नी जरुरी है, जिनके बोलने से कुछ हो सकता है। विधान सभा में भेजे गये निर्वाचित विधायको की चुप्पी तोड़नी है। लेकिन दुर्भाग्य यह है कि आज उत्तराखण्ड की विधान सभा में एक-दो विधायकों को छोड़कर कोई विधायक ऐसा नहीं है जो गैरसैंण का पक्षधर हो। सब के सब अपने आपको को जनसेवक की बजाय नीति-नियंता समझे बैठे हैं और देहरादून का मोह छोड़ नहीं पा रहे।
    क्या इनका अंतर्मन कभी यह नहीं सोचता होगा कि जिन लोगों ने इनकी कुर्सियों और इनकी विधानसभा के लिये अपनी जान दे दी, उनकी भावना क्या थी। बेशर्म……………………..धिक्कार है, फिटकार है, लानत है।

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