2 responses to “इतिहास की भूलों से सबक”

  1. Kamla pant

    Aapne Jo bhi likha bah sahib likha par age kya aur kaise? Is par bhi apne vichar rakhen. Kya karne ki socket haein/kar raven haven.

  2. ambuj sharma

    आदर्णीय तिवारी जी , आपकी बातें बिलकुक सत्य हैं ! आज भी हम लोग रास्ट्रीय सोच के आवरण से बहार नहीं निकल पाए हैं ! जल जंगल जमीं हमारे सब के सयुंक्त मुद्दे थे, हैं, और रहेंगे ! अब हल होंगे की नहीं, कोई नहीं कह सकता, क्योंकि इन मुद्दों को उठाने वाला दल ही जब इन्हें भुला चूका तो दुसरो से क्या उम्मीद करनी ! बाकि हमारे राष्ट्रिय दलों की पहले से चली आ रही साजिश जिसमे गड़वाल वि. कुमाऊ , ठाकुर वि. ब्राहमण , छोटी धोती वि. बड़ी धोती , टेहरी वि. पौड़ी आदि से हम, आज भी पार नहीं हो सके हैं ! बाकि बची हमारे नेताओं की सोच तो हमारे नेता तो गाँव के पुराने ठेकेदार लोग हैं जो सिर्फ पैसे बाँट कर ठेका लेना और कमीशन देकर पेमेंट लेना जानते हैं , ये तो सिर्फ आपने फायदे की ही योजना बना सकते हैं प्रदेश की नहीं !

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