One response to “धन्य हैं निशंकजी! इस बार ज्यादा ठग लाये”

  1. घिंघारु

    उत्तराखण्ड का दुर्भाग्य यह रहा कि केन्द्र से खैरात मांग कर ले जाना ही मुख्यमंत्रियों की उपलब्धि बनता रहा। क्या कोई मुख्यमंत्री यह भी करने का साहस कभी रख पायेगा कि अपने संसाधनों से, अपनी आय से अपने राज्य के लिये एक वर्ष का बजट पेश कर सके?

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