One response to “सत्ता जीती, उत्तराखण्ड क्रान्ति दल हारा”

  1. घिंघारु

    उक्रांद से उत्तराखण्ड की जनता को काफी उम्मीदें थीं, लेकिन कुछ इनकी कार्यशैली, राजनीतिक हड़बड़ाहट, उतावलापन और नेताओं की फौज और कुछ संसाधनों की कमी के चलते इन्हें विधानसभा में अपेक्षित प्रतिनिधित्व नहीं मिला। लेकिन आज भी बुद्धिजीवी, समाजवादी, आन्दोलनकारी लोगों को इनसे बहुत अपेक्षा करती है। लेकिन यह लोग मंत्री पद और लालबत्तियों के मोह में ऐसे फंसे हैं कि निकल ही नहीं पा रहे हैं।

Leave a Reply