One response to “उत्तराखण्ड को एक और आंदोलन की जरूरत”

  1. घिंघारु

    ऐसा लगता है कि उत्तराखण्ड के जनआन्दोलनों का दशक के चौथे साल से कुछ लगाव सा है। 1974, 1984. 1994 में बड़े और पूरे प्रदेश व्यापी आन्दोलन हुये। 2004 में भी कुछेक आन्दोलन हुये ही। मुझे 2014 का इंतजार है, जब उत्तराखण्ड में भष्ट्राचार उन्मूलन, स्थाई राजधानी और नवनिर्माण के लिये एक और जन आन्दोलन होगा। लेकिन यह पहला मौका होगा, जब जनता अपने द्वारा निर्वाचित सरकार से लड़ाई लड़ेगी।

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