धोनी की शादी में पगलाये सभी पहाड़वासियों को टीवी पर छद्म उत्तराखंड़ी संस्कृति के बीच बेगाने की शादी में बाराती बनने की हार्दिक शुभकामनायें। उन लोगों को भी जिन्हें पहाड़ की संस्कृति उस समय याद आयी जब बाजार बनते एक खेल के कमाउ व्यक्ति की शादी को भी सब लोगों ने बाजार के रूप में इस्तेमाल किया। आपकी संस्कृति को भी। क्योंकि किसी पत्रकार की औकात नहीं थी जो इस शादी का सीधे प्रसारण कर पाता। पहाड़ियों की तो छोड़ों। इसलिये उन्होने धौनी कहां बैठा था, किस कमरे में रहा था, इसकी वीडियोग्राफी की। जो उसे अपनी दुकान चलाने के लिये चहिये था वह चैनलों ने पहाड़ के कुछ लोगों को अपने स्टूडियों बैठाकर पूरा कर लिया। धौनी के बारे में आप लोग पता नहीं क्यों इतने आग्रही हैं कि उसे पहाड़ी बनाकर छोड़ोगे। उसने देहरादून में आकर शादी की, उसने पहाड़ी रीति-रिवाज से शादी की, उसकी दुल्हन ने पहाड़ी गलोबंद पहना और भी बहुत सारी परीलोक की कहानियां आप सब लोगों ने सुनी और सुनाई लेकिन इस सबके बीच आपके पहाड़ी होने के गौरव को कैसे सम्मान मिला यह मेरी समझ में नहीं आया।
धौनी के पहाड़ी होने पर गर्व करने वाले पहाड़ियों के सामने एक सवाल रख रहा हूं आप लोग शायद अन्यथा नहीं लेंगे। यह सवाल है देश के सबसे बड़े नर पिशाच कोली का जो उत्तराखंड के सल्ट विकास खंड का रहने वाला है। एक सीधा-साधा पहाड़ी। अपनी रोटी और बच्चों को पालने की गरज से दिल्ली चला गया मेरी और आपकी तरह। एक कोठी में काम करने लगा। अपने मालिक के लिये उल्टे-सीधे काम। असली अपराधी उसका मालिक है। उसके पास अपार पैसा है। वह लगातार हर केस में बरी होता जा रहा है। अभी किसी को यह पता भी नहीं है कि कोली ने यह अपराध किया भी था या नहीं। जिसके घर में कथित रूप से कोली बच्चों को मार रहा था उसके मालिक को पता ही नहीं है। सीबीआई और जांच एजेन्सियां और न्यायालय हर तीसरे महीने में कोली को हर केस में मृत्युदंड दे रही है और हर केस में पंडेर को बरी किया जा रहा है। पंडेर के साथ एक जमात खड़ी है। एक अपराधी के साथ।
मैं यह नहीं कह रहा हूं कि आप कोली के साथ खड़े होइये। पहाड़ मे उसकी बीबी और वह बच्चा है जिसे वह पेट में छोड़ आया था। बूढ़ी मां है जो पूरे जीवन भर उस अपराधी की मां का कलंक ढो रही है जिससे बड़ा अपराधी दुनिया में और कोई नहीं। धौनी की शादी का जश्न मनाने वाले पहाड़ी क्या कोली की मां और बीबी को भी वैसा ही अपराधी मानते हैं जैसा कोली है? जिस प्रकार धौनी जैसी पूरी पहाड़ी कौम नहीं हो सकती वैसे ही कोली की तरह पूरी पहाड़ी कौम नहीं हो सकती। इसलिये धौनी के लिये जश्न मनाने वाले लोगो आइये अपने मानवता धर्म और आपकी भाषा में पहाड़ के हितैषियो हम आगे आकर पहाड़ की उस बेबा की मदद करें जो पूरी संसार से बेवजह तिरस्कार ही नहीं जीवन का संघर्ष भी कर रही हैं। क्या आप और हम सच्चे पहाड़ी हैं जो इस सत्य को स्वीकार करने के लिये तैयार हैं। यदि हां तो फिर पहाड़ी धौनी और पहाड़ी कोली के परिवार के फर्क को पाटिये।
main es baat per garv karta hu ki main ek pahari hu, lakin jaha baat hai Dhoni or Kholi ki
dono ek alag tarhe ki kahani ya fir praverti ke baat hai, kyo ki dono pahari hai, esliye ye
hamare liye garv ki baat hai ki, dhoni ke karan Uttrakhand ka naan aage aaye ke saadi main he saye,
lakin jaha koholi ki baat hai wo bhi hamare liye ek kaala dhaba sabit huwa or main es baat ke liye hamesa sarminda rahunga…..
Tewari ji
aap thodi si bhul kar rahe hai ..bura mat manana ….koli nirdosh ni tha …ye sach hai wo kya galt or sahi nahin pahchanta tha ho hi ni sakta …bhukhe bhediye ki traha usne bachhe mout ke ghat utare hai ye bhi sach hai …rahi bat punder ki wo to hamare gande system ki den hai ki ese log bach nikalte hai ..main yahan pe aapko ek bar fir kah deta hun aaj nahin kal jis din punder jail se bahar hoga jo usi paw se undar jayega log itane bewkuf ni rah gaye hai ….sach or wakt ka intzar karo bas….jo koli bachhe churane school tak ja sakta hai kya wo thane main ni ja sakta tha ? kya wo pahad wapas ni aa sakta tha ? agar uske andar iman hota sarkar wo esa karta hi nahin bas wo sab paise ke liye kiya chaka cod ki duniya mian pagal ho gaya wo …or kuchh nahin…use fansi milani chahiye sath main punder ko bhi fansi lagani chahiye ….aap galat hai sir yahan pe …main kya aapke in sabdon ko koi bhi pahadi nakar dega ..wo kya pahad se anokha bahar gaya ?? yehi sab sikhaya hamari kumauni sanskriti ne use ki kisi ke bachhon ko jinda kha jaye …nahin paise ka bhukha tha wo ….pahad se sabhi bahar jate hai par bura bala sabse pahle pahchanta hai pahadi …..usane kabhi anyay ni dekha hota hai wo karta bhi nahin …wo sirf or sirf paise ke liye bhaga uske liye ek sabd bhi bol kar ham sayad bhul karege …han support karna hai to uski faimly ko karo jo dar-2 ki thokaren kha raha hai …uske gunahon ki saza wo bhugat rahe hai jo galat hai …….dhanywad